रविवार, 30 मार्च 2008

कितना सच है आज भी मल्थास का सिद्धांत

मानव ने विकास तो खूब किया आधुनिक संसाधनों ,सुरक्क्षित मापदंड को ध्यान में रखते हुए सुखा, अकाल,भुखमरी ,फ्लेग महामारियों से लड़ने के लिए आधुनिक संसाधनों से सुरक्क्षित उपाय खोज लिए अब इंसानों को लम्बी उम्र यानी कि अमर बनाने के उपाय पर भी खाज जारी है ऐसे में माल्थस का जनसख्या का सिद्धांत हरता नजर आता है पर एक ओर तो किसी कि नजर नहीं गयी जो साठ दसको से आहिस्ता -आहिस्ता अपने कदम बदाता चला जा रहा है ,समाज कि रग-रग में समाता चला जा रहा है महामारी कि तरह आज देश हमारा विकास के पथ पर अग्रसर है देश कि उत्पादन क्षमता युवाओ से ही है ओर ये दुश्मन युवाओ को निगलने कि फिराक में है हर वर्ष ५५००० हजार लोग इसकी वजह से मौत के मुह में चले जाते है साथ में चली जाती है उन युवाओ को योग्य बनाने कि साडी मेहनत अब उसकी नजर अपने नए ग्राहक के रूर में बच्चे व महिलाये है और वो उनको लुभावने रूप रखकर प्रभावित कर रहा है पर अब तक मेने उस बहुरूपिये का नाम तो बताया ही नहीं चलिए उससे परिचित करती हू सावधान रहने के लिए पहले ये शराब ,भांग अफीम के रूप में था पर अब इसने भी अपना आधुनिकीकरण कर लिया स्मेक चरस, गांजा,हिरोइन नशीली गोलिया रजनीगंधा ,पान मसाला ,त्रिकाल, पेंथर ,आनंद ,लहर ,कमला पसंद आदि अनेक नाम से मौत बिक रही है जोकि सस्ते होने के नाते युवाओ कि पहुच में भी है परिणाम स्वरुपकुछ समय बाद उन्हें उसकी लत लग जाती है और टी बी कैंसर एड्स जैसे भयानक रोग उपजाते है हेरानी कि बात तो ये है जो काम्पनियातम्बाकू उत्पाद बनती है वे जानती है कि हमारे नियमित ग्राहक कुछ दिनों बाद ख़त्म हो जायेगे शायद इसीलिए नए ग्राहक के रूप में उनकी नजर बच्चो और महिलाओ पर गढी है आज बच्चो के लिए सिगरेट के आकर कि टोफियाऔर तम्बाकू पुच कि तरह मीठी सुपारी के पैकेट बाजार में उपलब्ध है और बच्चे भी बडो के अंदाज में इन उत्पादों को खरीद कर खाते है कुछ समय के बाद बच्चे इन सब को छोड़ नशीले उत्पादों को भी प्रयोग करने लगे तो आश्चर्य नहीं बच्चो के आदर्श तो घर के बड़े ही होते है और वे उन कितरह ही बनना चाहते है उनके नशा करने कि खबर सबसे बाद में लगाती है वो माँ-बाप ही होते है तब बात कठिन मोड़ तक पहुच जाती है फिर दोड शुरू होती है उससे उत्पन्न बीमारियों से लड़ने का
ताजुब्ब होगा जान कर अधिकतर तमाबकोओ उत्पादन करने वाली काम्पनिया ही दवाओ का भी उत्पादन करती है लाभ हर हाल में उनको ही मिलाता है जनता को नहीं अगर अब भी हम सचेत न हुए तो मल्थास का जनसंख्या का सिद्धांत सच साबित होजायेगा हमारे हाथ जो शेष होगा वो वर्द्ध और दुदमुहे बच्चे उनको पालने वाली शक्ति से हम वंचित हो जायेगे , देश ने जो विकास किया है उसे आगे बडाने वाली युवा शक्ति ही नहीं रहेंगी तो देश विकसित देशो का मोहताज होजायेगा और एक दिन ऐसा आएगा कि फिर हम विकसित देशो के गुलाम कहलाये गे ,पूर्णतया आर्थिक रूप से गुलाम हो जायेगे समय रहते हमें सचेत हो जाना है ,अभी भी सभालाने का वक़्त है हमारे पास अपने को व अपने प्रियजनों को नशे से दूर रखने व अपने समाज को नशे के हर रूप से बचाए हमारा ये नेतिक दायित्व भी है समाज के प्रति
सुरभि

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